भारत ये एक कृषि प्रधान देश है। ये बात हर कोई जानता है पूरी दुनिया में भारत का नाम सभी चीज़ो के लिए फेमस है। वैसे देखा जाये तो दुनिया में सिर्फ एक ही  इंसान है जिसके वजह से हर एक व्यक्ति खाली पेट नहीं सोता। वो है किसान और सदियों से चलती आये खेती की परंपरा है, जिसके बल पे हर किसी के घर में अनाज, सब्जी, फल आते है। 

किसान खेती करता है। दिन रात खेतो में हल चला के अनाज बोटा है। वैसा देखा जाये तो खेती करना ये कोई आसन खेल नहीं हर किसी के बस के बात नहीं होती खेती कर के पूरी दुनिया की भूख मिटाना। इसलिए आज भी जब किसान की बात होती है तो हर कोई उसका कर्ज़दार है। 

किसान हर किसी की भूख तो मिटाता है लेकिन कभी सोचा है की क्या वही किसान खुद भर पेट खाना खाता है या नहीं? लोगो के बारे में सोचने वाला ते इंसान खुद के बारे में सोचता है भी या नहीं? सब लोग बोलते की हर दिन सोने से पहले २ लोगो का शुक्रिया करना चाहिए एक जवान जो सरहद पे अपनी जान खतरे में दाल के पुरे देश की रक्षा करता है और दूसरा किसान जो खुद खाली पेट रहकर पुरे देश की भूख मिटाता है। 

कभी आपने सोचा भी है जो इंसान सब को खाना देता है वही अगर सड़क पे आकार उनके हक्क के लिए लड़े तो क्या ये सही है? 

घर में बैठ कर बड़ी बड़ी बाते करना तो आसन है लेकिन किसान की ज़िंदगी जीने का समय आता है/ किसान की तकलीफ़ के बारे में बात की जाती है तो सब मुह मोड़ लेते है। आज सच में किसानों को आपने साथ की जरुरत है। 

किसान आंदोलन क्या है?

भारत की राजधानी दिल्ली में आज वो दिख रहा है जो आज से ३२ साल पहले दिखा था । उत्तर भारत के सभी किसानों ने केंद्र सरकार द्वारा जारी किये गए नए किसान बिल को लेकर राजधानी दिल्ली पे आंदोलन छेड़ा है। इस आंदोलन में सबसे ज्यादा पंजाब प्रांत से किसानों ने सहभाग लिया है और बीते १ महीने से ये आंदोलन लगातार चल रहा है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान नेता महेंद्र सिंग टिकेट ने लाखों किसानों को लेकर राजधानी दिल्ली की सिमा पे आंदोलन छेड़ा था और आंदोलन की मांग ये थी की गन्ने को ज्यादा से ज्यादा भाव मिले और बिजली और पाणी के बिलों में छूट मिल जाए। ये आंदोलन लगातार २ हफ्ते चला और अब किसानों ने इसी आंदोलन में नयी मांग की है की कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने लागू किया हुआ नया किसान बिल (कानून)वापस लिया जाए।

ये था इस आंदोलन का सारांश । अब में आपको बताती हूँ की ये नया किसान कानून क्या था?

नया किसान कानून क्या है?

भारतीय सांसद लोकसभा और राज्यसभा में पारित किये गए इस किसान बिल में ३ महत्वपूर्ण कानून बनाए गए है।

कानून 1:कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020

इस कानून की मदत से सरकार ने किसानों को छूट दे दी है की वो अपने उपज या उत्पादन को कहा बेचे। अगर किसी किसान को लग रहा है की उसके उपज को APMC मंडी में ज्यादा भाव नहीं मिल रहा है तो इस कानून की मदत से अपनी उपज को मंडी के बाहर किसी भी ख़रीददारी को बीच सकता है। कोई भी ख़रीददारी किसी भी रजिस्ट्रेशन के न होते भी उसको खरीद सकता है।

क्या होगा असर?

किसान संघटन का ये कहना है की इस कानून के चलते सरकार APMC मंडीयो को ख़त्म करने का विचार कर रही है। उसी तरह अगर सरकार ने किसी भी ख़रीददारी को किसनो की उपज खरीदने की छूट दे दी तो इससे २ बाजारों की एक कल्पना बन जाएगी। APMC बाजार और खुला बाजार।

अगर यह कानून लागू किया जाता है तो सरकार खुद ही इसमे फस सकती है और, ख़ुदका नुकसान भी करवा सकती है।

कैसे होगा सरकार का नुकसान?

अगर APMC मार्किट के बाहर ख़रीददारी करने की खुली छूट मिलेगी वो भी बिना किसी पंजीकार के तो वो ख़रीददारी सरकार टैक्स पे नहीं करेगा और सरकार का नुकसान होगा। इसी तरह सरकार इस बाजार में होने वाले मोल भाव या प्राइस वेल्यू को जन नहीं सकती । इस कारण बाजार में क्या काले धंदे हो रहे इस बात से सरकार बेख़बर रहेगी और सरकार खुद के पेअर पे कुल्हाडी मार लेगी।

सरकार कह रही है की हम इस कानून के मदत से किसानों और सब्जी मड़ई में सुधर लेन का प्रयास कर रहे है लेकिन इस कानून में कही भी इस चीज़ का जिक्र किया गया नहीं है। ये सही बात है की मड़ई में पांच आदति मिलकर किसानों की उपज का भाव तय करते है। इस चीज़ को लेकर सरकार ने ये नया कानून बनाया है।

कानून 2-कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत अश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, 2020

इस कानून में सरकार ने ये बताया है की आप यानि किसान और निजी कम्पनियो में एक समझौता या करार करेंगे और करार के अनुसार किसान की ज़मीन में वो कंपनी फसल करेगा। इस प्रकार की खेती को हम कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कहते है।

कंट्रक्ट फार्मिंग के बारे में यहाँ पढ़िए: गांव में चलने वाले  बिज़नेस 

क्या किसानों का नुकसान होगा?

आपकी जमीं को कोई निवेशक या ठेकेदार एक फिक्स कीमत में आपसे किराये पे लगा और उसमे वो जो चाहे फसल उगायेगा। किसान यहाँ पे बस एक औपचारिक तौर पे उपस्थित रहेगा और आने वाली उपज से जो भी राशि मिली है उसमे से करार में जो राशि तय हुई थी उसका लाभ लेग। लेकिन यहाँ पे एक बात देखि जाये तो किसनो को दुय्यम दर्जा दिया गया है। कोई भी किसान अपनी खेती को माँ की तरह समजता है वो न तो उसे बेचता है और न ही उसे किराये पे देणे का सोचता है। 

क्या किसान इसके लिए समर्थ है?

अब हम लोग ये मानके चलते है किसान कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को सपोर्ट करते है और उन्होंने अपनी खेती किसी ठेकेदार को किराये पे दे दी, लेकिन आगे चलके ठेकेदार और किसान के बिच कुछ विवाद हुआ तो किसान कहा पे अपनी शिकायत लेके जाये और इन सब चीज़ो के लिए किसान समर्थ है।

इस कानून के तहत अगर किसान और कॉन्ट्रैक्ट कंपनी में कोई विवाद होता है तो वो उसे ३० दिन के अन्दर निपटाए और अगर नहीं होता है तो देश की ब्यूरोक्रेसी में न्याय मांगने जाये और वह पे ये मामला ३० दिन के भीतर निपटाए। अगर वह भी ये विवाद नहीं मिटाता तो एक ट्रिब्यूनल या समिति के सामने हाज़िर वो जहाँ SDM उस के प्रमुख रहते है और वह ये विवाद सुलझा ले। लेकिन किसान को धरा १९ के तहत सिविल कोर्ट जाने से वंचित रखा है।

कानून 3-आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक, 2020

यह कानून किसानों को ही नहीं बल्कि आम जानता के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। इस कानून के माध्यम से सरकार ने फसल या कोई भी उपज हो उसके अन लिमिटेड स्टॉक करने की परमिशन दी है। लेकिन क्या ये सही है? क्योंकि इसके चलते बाजार में उधम मच जायेगा और जो भी पैसे वाला है वह खुली छूट होने के कारण ज्यादा से ज्यादा फसल का स्टॉक कर के रखेगा । इसके चलते बाजार में होने वाले घपले और काला बाजार से सरकार अनभिग्य रहेगी और सारे चीज़ो के दाम आसमान छू लेगे।

सरकार इस कानून में ये भी लिखित है की युद्धजन्य परिस्थिति या अकाल या भुखमरी में ही स्टॉक करने पे पाबंदी लगा देगी । 

सरकार तो ये कह रही है की इससे आम किसनो तो फायदा ही होगा क्युकी वो जितना चाहे स्टॉक अपने पास रख सकते है और जब भी उनको लगे की फसल को अच्छा भाव मिल रहा है तब वो बेच सकते है। लेकिन क्या सरकार ये जानती है की भारत जैसे देश में ८०% किसान छोटे और मज़ाले किसान है जिनके पास अपनी फसल को स्टॉक करने की कोई सुविधा नहीं है।

सरकार को इस चीज़ का पता होणा चाहिए की कोई भी किसान अपने उपज को स्टॉक करने के लिए कोई भी भंडार बनवाके नहीं रखता है। वो तो जब भी फसल होती है तभी काम ज्यादा भाव कर के उसको बेच देता है। और ना ही सरकार ने ज्यादा गोदाम बनवाए है जहाँ किसान अपने अनाज को स्टॉक कर सकता है। 

इस कानून से फायदा उन लोगो का होगा जिन्होंने बड़े बड़े गोदाम बंद रखे है वो किसान की फसल किसी भी भाव में खरीदकर  स्टॉक कर के रख सकते है।और जब भी भाव आसमान को छू ले तब उसको बेच सकते है।

नए किसान कानून पे सरकार का फैसला?

किसान कानून पर चल रहे आंदोलन के ४० किसान संघटनाओ के सदस्यों को सरकार ने ३० दिसंबर को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। सेप्टेम्बर २०२० में लागू किये इस कानून का फिर से स्टडी कर के उसमे क्या सुधर किया जा सकता है और उन संघटओं का इसपे क्या विचार है इसलिए ये बैठक बुलाई गयी है।

किसान आंदोलन के ४९ दिन यानि १३ जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय जिसमे, किसान नेताओं ने कहा कि वे 15 जनवरी को सरकार के साथ होने वाली बैठक में शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाई गई चार सदस्यों की समिति में बीकेयू के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, शेतकारी संगठन (महाराष्ट्र) के अध्यक्ष अनिल घनवत, अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान दक्षिण एशिया के निदेशक प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी शामिल हैं।

१५ जनवरी को वाले इस मिटिंग जो भी कुछ निर्णय होगा उस हिसाब से किसान आंदोलन नया मोड़ लेगा। इस मीटिंग मैं होने वाली चर्चा से किसान सरकार के फैसले को मानकर अपना आंदोलन पीछे लेंगे या फिर नयी समस्या खड़ी करेंगे ये सब १५ जनवरी को देखने को मिलेगा।

निष्कर्ष :- 

देश को चलने वाले किसान जिस हक्क के लिए लढ रहे है, जिसके लिए वो आंदोलन चालू है वो  मांगे सरकार पुरे करेगी इस उम्मीद में वो दिल्ली की सडको पे बैठे है। सरकार उन मानगो को समझ कर किसान को न्याय दे । पूरी देश की जानता किसान के साथ उनके हिथ में किसान आंदोलन में शामिल हुआ है। अगर आपको हमारा ये ब्लॉग पसंद आये तो निचे कमेंट बॉक्स में कमेंट जरुर करे। और आपने दोस्तों के साथ शेयर करे।


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Aishwarya Jagtap
हेलो फ्रेंड्स , मेरा नाम ऐश्वर्या जगताप है , और मैं lovelifecaree.com की Author हु । मुझे टेक्निकल ब्लोग्स लिखना पसंद है। यहाँ मेंने बड़े ही आसान तरीके से हिंदी में आपको करियर के बारे में- डिजिटल मार्केटिंग , बिज़नेस , इन्वेस्टमेंट , और इंटरनेट से एअर्निंग कैसे करे। इन सब के रिलेटेड टिप्स आप को suggest किये है।

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